stress


परीक्षा का समय पास आते ही बहुत सारे विद्यार्थी तनाव से ग्रसित हो जाते है। तनाव के कारण वे अपनी प्रतिभा का पूर्ण लाभ नही ले पाते जिसके फलस्वरूप वो परीक्षा में अपनी पात्रता के अनुरूप प्रदर्शन नही कर पाते। ऐसे में आवश्यक है कि विद्यार्थियों को यथासंभव तनाव से दूर रहने का प्रयास करे और उन उपायों का सेवन करे जिससे बुद्धि की वृद्धि होती है।


क्यों होता है तनाव


परस्पर प्रतिस्पद्र्धा, पाठयक्रम का बोझ, अपने सामथ्र्य से अधिक अपेक्षाएं, माता पिता की अपने बच्चो से अव्यवहारिक अपेक्षाएं, उपलब्धियों और इच्छाओं के बीच दूरी अधिक होना, कम समय में अधिक कार्य करना, होमवर्क अधिक मिलना, काम की अनियिमितता व स्कूल और टयूशन दोनो का एक साथ इकटठा बोझ, स्कूल अथवा कालेज की घर से दूरी अधिक होना, परीक्षा का भय, परीक्षा में पूछे जाने वाले अस्पष्ट प्रश्नों की शंका, परीक्षा में कम अंक आने की सम्भावना, अध्यापक और माता पिता की अधिक सख्ती, अध्यापक और अभिभावकों का व्यवहार मित्रतापूर्वक न होना, माता पिता द्वारा बच्चों के लिये समय न होना, अपनी रूचि के अनुरूप कोर्स न मिलना, एकाग्रता की कमी, इच्छाशक्ति का अभाव आदि जैसे कारण विद्यार्थियों में तनाव के कारण बनते हैं।

तनाव से बचने के लिये इन्हे अपनाये

ब्राह्म मुहूर्त में उठे
जी हां, ब्राह्म मुहूर्तमें उठने से सौन्दर्य,यश, बुद्धि, धनधान्य, स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। इस काल में उठने से शरीर , मन और मस्तिष्क की शुद्धि होती है, बुद्धि निर्मल होती है और एकाग्रता का अभ्यास सरल होता है। सूर्य उदय होने से 90 मिनट पूर्व का समय ब्राह्म मुहूर्त कहलाता है।

पुराने घी के सेवन से बुद्धि बढ़ती है

आयुर्वेद के ग्रन्थों में पुराने घी को श्रेष्ठ बुद्धिवर्धक कहा है। दस वर्ष पुराने गाय के घी में से तीक्ष्ण गंध आती है। दस वर्ष रखने पर उसमें लाक्षा रस के समान गंध आती है और वह शीत होता है और मेधा की वृद्धि करता है। सौ वर्ष पुराना घृत तो परम उत्तम होता है। जब भी शुद्ध घी का सेवन करें तब उसके उपरांत शीतल जल न पिएं आपितु गर्म जल का सेवन करें।

सात्विक गुणो की वृद्धि करें

सत्त्वगुण के कारण देह में तथा अन्तःकरण और इन्द्रिय मे चेतनता और विवेक शक्ति उत्पन्न होेती है। तमोगुण के कारण अन्तःकरण और इन्द्रिय मे अप्रकाश, कर्माें में अप्रवृत्ति, प्रमाद व मोह आदि की उत्पति होती है।गीता के अनुसार आयु, सत्व,बल, आरोग्य,सुख, प्रीति वर्धन ,रसयुक्त, स्निग्ध एवं स्थिर सात्विक आहार होता है।

उचित नींद ले


चरक संहिता के अनुसार मनुष्य का सुख दुख,बल, दुर्बलता, ज्ञान, अज्ञान, निद्रा पर ही आश्रित है। अगर कोई व्यक्ति पूरी नंीद लेता है तो उसे बल,सुख व ज्ञान की प्राप्ति होती है। सोने के समय पर जबरदस्ती जागने से आखों में पीड़ा, सिर में वेदना, आंखों में भारीपन होता है। उचित निद्रा लेने से सुख, बल व ज्ञान की प्राप्ति होती है। अतः अच्छे स्वास्थ्य के साथ ही विद्यार्थी विद्या का लाभ ले सकता है।ब्रह्मचर्या का पालन करें।


अपनी इन्द्रियों पर संयम रखे। जी हां इससे शरीर में बल बना रहता है व एकाग्रता भंग नही होती। ब्रह्मचर्य के बल पर कठिन से कठिन कार्य संपन्न किये जा सकते है। पदम पुराण अनुसार मनमे, प्राणममें उच्च भावों का पोषण, शुभचिन्तन के द्वारा शरीर और मन में क्रमशः उन्नतिशीलता का निर्माण करते हुये समस्त दोषें से अपनी रक्षा करते हुये समुन्नति की चेष्टा ही ब्रह्मचर्य है।
इनसे बढ़ती है बुद्धि
स्नान करने से शरीर में पवित्रता बनी रहती है। शरीर की थकावट, पसीना व मल की दुर्गन्ध दूर होती । शरीर स्वच्छ रहता है और शरीर के स्वच्छ रहने से भी बुद्धि की वृद्धि होती है।दूध के सेवन से बुद्धि की वृद्धि होती है। मन के अनुकूल आप्तपूर्ण विश्वास और धर्म अर्थ सम्बन्धी वचनों को कहने वाले मित्रों का ही साथ करें । वार्तालाप भी इसप्रकार कर करें कि विज्ञान, धैर्य स्मरण शक्ति की वृद्धि होती है।https://www.youtube.com/watch?v=PS4JM26kLvM
चरक ने मण्डूकपर्णी का स्वरस, मुलेठी चूर्ण, गुड़ूची स्वरस व जड़ और फल सहित शंखपुष्पी को पीस कर बनाये गये कल्क को मेध्य रसायन के नाम से वर्णित किया है। इन चारों में से शंखपुष्पी को सर्वश्रेष्ठ कहा है।

इनसे बढ़ती है बुद्धि

स्नान करने से शरीर में पवित्रता बनी रहती है। शरीर की थकावट, पसीना व मल की दुर्गन्ध दूर होती । शरीर स्वच्छ रहता है और शरीर के स्वच्छ रहने से भी बुद्धि की वृद्धि होती है।
दूध के सेवन से बुद्धि की वृद्धि होती है।
मन के अनुकूल आप्तपूर्ण विश्वास और धर्म अर्थ सम्बन्धी वचनों को कहने वाले मित्रों का ही साथ करें । वार्तालाप भी इसप्रकार कर करें कि विज्ञान, धैर्य स्मरण शक्ति की वृद्धि होती है।
सुश्रुत अनुसार हरीतकी चूर्ण के प्रयोग से मेधा की वृद्धि होती है। वर्षा ऋतु का जल जो भूमि पर गिरने से पहले किसी अच्छे बर्तन मे इकटठा कर लिया जाए उसके प्रयोग से भी धारण शक्ति अर्थात जिस किसी विषय को पढ़ लिया जाए उसको याद रखने की शक्ति बढ़ती है। ताजा मक्खन भी बुद्धि को बढ़ाता है। यवतिक्ता अर्थात कालमेघ का तेल मेधा के लिये हितकर होता है।गोमूत्र मेधा के लिये हितकर होता है।


बिजौरा नींबू का गूदा बुद्धिवर्धक होता है। चिकित्सकीय निर्देशन में वचा, सुवर्ण भस्म व बिल्व चूर्ण का घृत, के साथ प्रयोग करने से बुद्धि और आयु की वृद्धि होती है।
सुश्रुत संहिता में ही लिखा है कि जौं को कूट कर बनाये गये भोज्य पदार्थाें का मधु व पिप्पली के साथ शास्त्राभ्यास स्वतः उसी तरह होता है जैसे बाल्यावस्था के बाद चलने की शिक्षा दिये बिना बालक स्वयं चलने लगते हैं।
चरक संहिता में वर्णित पंचम हरीतकी योग का प्रयोग भी बल एवं बुद्धि की वृद्धि करता है।http://healthyminute.in/conception-ceremony-means-of-obtaining-the-best-child/

प्रोफेसर अनूप कुमार गक्खड़

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