थकावट

 

थकावट और आलस्य पहले से ही ठीक चल रही जिंदगी में ब्रेक लगाने का काम करती है। लगातार इनका बना रहना इस बात का सुनिश्चित करता हैं कहीं न कहीं हमारी जीवन शैली में कोई न कोई दोष है अथवा हम किसी रोग से ग्रसित होने हो जा रहे है।

क्यों होती है थकावट?


थकावट होने के विभिन्न कारण है। अधिक सोने की आदत से भी थकान हो सकती है। प्यास लगी हो और पानी न पिया जाए तो भी थकान हो जाती है। कोई शारीरिक काम करने पर जब सांस फूलती है तो उसको जबरदस्ती रोका जाए तो थकावट होती है। व्यायाम अधिक कर लिया जाए तो भी थकान होती है। शरीर में किसी विकार के कारण अगर हड्डिया कमजोर हो जाए तो थकान होती है। वातज ज्वर में व्यक्ति थक जाता है।अगर कोई व्यक्ति सारा दिन कोई काम नही करता तो अचानक अधिक काम करतो भी थकान होती है। अम्लपित्त अर्थात एसिडटी की शिकायत होने पर थकावट होती है। इसके अधिक देर तक रहने से व्यक्ति कई रोगों से ग्रसित होता है।

इससे होता है आने वाले रोगों का संकेत



आयुर्वेद अनुसार बिना काम किये अगर थकावट होनी शुरु हो जाए तो इसका अर्थ है कि व्यक्ति ज्वर, कुष्ठ रोग, यक्ष्मा, से ग्रसित होने वाला है। अधिक देर तक बनी रहने वाली अवस्था से पैत्तिक ज्वर, पैत्तिक प्रमेह, कुष्ठ आदि रोग पैदा होते हैं। खून की कमी बनी रहे तो भी थकावट होती है। अगर कोई व्यक्ति खड़ा है और उसकी इच्छा बैठने की हो और अगर वह बैठा है और उसकी इच्छा लेटने की हो और अगर वह लेटा है तो उसकी इच्छा सोने की हो तो इसका यह संकेत है कि वह रोगी मधुमेह से ग्रसित हो रहा है।

रोग के लक्षण के रूप मे थकावट


स्त्रियों को थकान के साथ साथ कमर दर्द की शिकायत हो तो उनको प्रदर अर्थात सफेद पानी के रोग की अवस्था को दर्शाता है। मोटापा होने पर कोई व्यक्ति अगर थोड़ा भी काम करता है तो वह जल्दी थक जाता है । पैत्तिक हृदयरोग में बिना काम किये जल्दी थक जाता है । रक्त की खराबी होने होने पर भी बिना परिश्रम के थकावट होती है। कोई जहरीला कीड़ा काट ले, राजयक्ष्मा रोग में भी व्यक्ति थकान का अनुभव करता है। क्रोध, शोक और थकान से उत्पन्न गर्मी बालो को सफेद करने में कारण होती है।

रखें सावधानी


थकान होने पर नीद अच्छी आती है लेकिन थकावट होने पर तुरन्त शीतल जल पी लिया जाए तो त्वचा के रोग होने की संभावना होजाती है। थकान होने पर वातवर्धक आहार अर्थात रूखा आहार नही लेना चाहिए।http://healthyminute.in/conception-ceremony-means-of-obtaining-the-best-child/


दूर करने वाले उपक्रम


आयुर्वेद के ग्रन्थों में थकावट दूर करने के लिये अनेक उपाय बताए है। चरक ने स्नान को थकावट दूर करने वाले उपक्रमो में से सर्वश्रेष्ठ कहा है। पैरो पर मालिश करने से थकान दूर होती है। रात को जागते रहने से अगर थकावट होती है तो प्रातः अपनी नींद के समय का आधा समय सो लेने से थकावट दूर हो जाती है।भोजन के बाद सम्यक अनुपान भी थकान नही होने देता है। व्यायाम और अधिक चलने से उत्पन्न हुयी थकावट को प्रतिमर्श नस्य दूर करता है। सुखपूर्वक बिस्तर पर सोने से थकान नही होती । पांव पर हल्क से दबाने से थकावट दूर होती है। पूरे शरीर में किया गया सेक भी थकावट को दूर करता है।

इनका सेवन दूर करता है थकावट


दूध के सेवन से भी थकान मिटती है। चरक ने अंगूर, खर्जूर, बेर, अनार, फालसा, अंजीर के फल, गन्ना, जौं, साठी चावल, व चिरौंजी थकान को दूर करने वाला कहा है।
सत्तू के सेवन से थकान दूर होती है। आकाश से गिरने वाला वर्षा का जल अगर भूमि पर गिरने से पहले एकत्रित कर लिया जाए तो उसके सेवन से भी लाभ होता है। दही का पानी न केवल थकान को दूर करता है अपितु शारीरिक बल की वृद्धि भी करता है और भोजन में रूचि भी पैदा करता है। प्रातः काल भोजन के उपरांत उष्ण जल, दोपहर के भोजन के उपरांत तक्र व रात के भोजन के उपरांत दूध का सेवन भी थकान नही होने देता।

रागषाडव लाजपेया के प्रयोग से थकावट दूर होती है। बिना कारण थकने पर तो शीतल जल पीना का निर्देश है लेकिन शारीरिक श्रम करने के कुछ देर बाद ही जल पीना चाहिए। ककड़ी के मौसम में ककड़ी खाने से थकावट दूर होती है।

https://www.youtube.com/watch?v=Z3JXyGuVSE8&t=56s

थकावट दूर करने वाली औषधियां

आयुर्वेद के ग्रन्थों में वर्णित कुछ योग ऐसे हैं जिनका प्रयोग थकावट दूर करता है।
यथा चरक में वर्णित आमलकायस रसयान ब्राह्मरसायन, द्वितीय सर्पिगुड़ से थकान दूर होती है। इनका प्रयोग केवल चिकित्सकीय निर्देशन में करना चाहिए।

प्रोफेसर अनूप कुमार गक्खड़
हरिद्वार

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