उत्तम स्वास्थ्य हेतु दोहे

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दोहे एक प्राचीन काल से चली आ रही छंद परम्परा है जिसमें प्रथम व तीसरे चरण में 13 व दूसरे और चैथे चरण में चरण में 11 मात्राएं होती हैं। यहां पर इस तरह का आधार न लेकर इमसें केवल स्वास्थ्य संबघिंत निर्देशों को ग्रहण किया गया है । उसका अलग ढंग से प्रस्तुतिकरण किया गया है। दोहों में कम शब्दों में अधिक व सटीक ज्ञान समाहित है। यह प्राचीन स्वास्थ्य सम्बन्धित ज्ञान को छंद परम्परा में इस ज्ञान को प्रवाहित करता है।

 

 

 दोहा 1

अदरक का रस लीजिए. मधु लेवें समभाग ।
        नियमित सेवन जब करें, सर्दी जाए भाग ।।

चिंतित होता क्यों भला,देख बुढ़ापा रोय।

हरड़ बहेड़ा आमला, यौवन स्थिर होय। ।

दोहा 3

मधु का सेवन जो करे, सुख पावेगा सोय ।

कंठ सुरीला साथ में , वाणी मधुरिम होय ।।

 

कफ से पीड़ित हो अगर, खाँसी बहुत सताय ।

अजवाइन की भाप लें, कफ तब बाहर आय.. ।।

दोहा 5

पीता थोड़ी छाछ जो, भोजन करके रोज ।

नहीं जरूरत वैद्य की, चेहरे पर हो ओज ।।

 

 

मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय

होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय ।।

. दोहा 7

बहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल ।
यूकेलिप्टिस तेल लें, सूंघें डाल रुमाल ।।

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पानी करके गुनगुना, मेथी देव भिगाय ।
सुबह चबाकर नीर पी, रक्तचाप सुधराय ।।

दोहा 9

अजवाइन और हींग लें, लहसुन तेल पकाय ।
मालिश जोड़ों की करें, दर्द दूर हो जाय.. ।।

 

अजवाइन को पीस लें , नीबू संग मिलाय ।
फोड़ा-फुंसी दूर हों, सभी बला टल जाय.. ।।

दोहा 11

जौं का आटा लीजिए, रोटी बनाये  सस्नेह ।

मूंग की दाल साथ हो, दूर रहे मधुमेह। ।

https://www.youtube.com/watch?v=jN66dzurlkU

 

जो नित सेवन करे आमला और मूंग की दाल ।

वैद्य को कोई जरूरत नही पूछे मधुमेह का हाल।।

दोहा 13

भोजन करके खाइए,सौंफ और गुडपान!

भोजन पच जायगा,जानै सकल जहान!!

 

 

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