massage - a boon for good health

Massage को लोक व्यवहार में मालिश कहा जाता है। तैल मालिश शब्द का प्रयोग भी इसी के लिये किया जाता है।आयुर्वेद के ग्रन्थों में लिखा है कि अन्न से आठ गुणा पिसा हुया आटा, पिसे हुये आटे से आठ गुणा दूध, दूध से आठ गुणा उड़द, उड़द से आठ गुणा घी लाभकारी होता है और घी से लाभकारी आठ गुणा तैल की मालिश होती है। चरक संहिता में लिखा है कि दैत्यों के गुरु ने भी तैल के प्रयोग से ही वृद्वावस्था से विजय प्राप्त की थी।

मालिश के लाभ

वाग्भट ने लिखा है कि मालिश करने से वृद्धावस्था थकावट एवं वातजन्य रोग दूर होते है। दृष्टि निर्मल होती है। शरीर पुष्ट होता है, आयु की वृद्धि होती है,नींद ठीक आती है
शरीर मजबूत होता है और त्वचा की कान्ति बढ़ती है। सिर कान व पैर के तलवों की मालिश विशेष रूप से करनी चाहिए।

कैसे करें मालिश

अगर मालिश हाथ और पांव पर करनी हो तो तैलको थोड़ा गर्म करके प्रयोग में लाएं। सिर पर मालिश करते समय ध्यान रखें कि मालिश तैल को बिना गर्म किये ही की जाए। मालिश कम से कम 15 मिनट व अधिक से अधिक 50 मिनट तक करनी चाहिए।

सिर में तैल मालिश के लाभ

रोजाना सिर पर मंल मालिश करने से सिरदर्द, गंजापन, सफेद बाल, जैसी समस्या नही होती । सिर का बल विशेश रूप से बढ़ता है। बालों की जड़ें मजबूत होती है। बाल काले और लम्बे होते है।सिर पर तैल मलने से इन्द्रियों प्रसन्न रहती है। मुख की त्वचा सुंदर होती है। नींद ठीक आती है।

कान में तैल डालने से लाभ


कान में तैल डालने कान में होने वाला दर्द, बिना आवाज के कान में सुनायी देना गर्दन का अकड़ जाना, जबड़ा कठिनायी के साथ खुलना, उंचा सुनायी देना, बहरापन जैसे विकार दूर होते है।
पैरों के तलवों में मालिश दृष्टि बढ़ती है
पांवों के तलवों पर मालिश करने से पैरो का खुरदरापन, खुशकी, रूखापन, थकावट, शरीर के अ्रगों का सोना, दृष्टि ठीक होना, लाभ होता है। दोनो पांव पर मालिश करने से सायटिका रोग नही होता। पांव में बिवाईयां नही मिलता।

मालिश से पूरे शरीर को लाभ होता है

जिसप्रकार किसी वृक्ष की जड़े जल से पोषित होती हैं, तैल मर्दन से चमड़ा, किसी गाड़ी के पहिये में तैल डालने से वह दृढ़ व शक्तिशाली हो जाता है उसी तरह शरीर में मलिश करने से वह इतना बलशाली हो जाता है कि वह छोटे मोटे रोगों का आराम से झेल जाता है। वाग्भटट अनुसार तैल मालिश की एक विशेषता है कि अगर पतला व्यक्ति कोई मालिश करे तो उसको मोटा व मोटे व्यक्ति को पतला करती है।

मालिश से ही लाभ क्यों ?

त्वचा स्पर्शनेन्द्रिय का आश्रय होने से उसमें वायु की अधिकता होती है और वात का शमन करने में तैल सबसे श्रेष्ठ होता है। इसलिये तैल मालिश परम उपयोगी होती है। रोजाना मालिश करने वाला व्यक्ति इतना सबल होजाता है कि अगर शरीर में कोई चोट भी लगें तो उससे अधि पीड़ा नही होती। ऐसा व्यक्ति देखने में सुंदर,उसकी त्वचा मृदु होती है और अकाल बुढ़ापे के लक्षण नही दिखायी देते। इस प्रकार अभ्यंग के द्वारा शरीर की रक्त संचार क्रिया सुव्यवस्थित एवं सुचारु होती हैं तथा शरीर के लिये हानिकर पदार्थों का निष्कासन शीघ्रता से होता हैं जिससे की शरीर में सौम्य, शिथिल ,सुन्दर तथा रोगरहित होता है।

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किस को नही करनी चाहिए तैल मालिश

नये बुखार में, जिसको प्यास अधिक लगी हो , भूख लगी हुयी हो, पित रोगी, कफज रोगों मे , पंचकर्म करवाने के बाद व अजीर्ण रोग मे मालिश नही करनी चाहिए। जिनको नकसीर फूटने की शिकायत हो को उनको तैल मालिश नही करनी चाहिए।

रोगों में भी होता है लाभ

श्वास रोग अर्थात दमा होने पर तिल तैल को गर्म करके उसमें सैंधव लवण मिलाकर छाती पर मालिश करने से लाभ होता है।http://healthyminute.in/combinations-of-sun-that-makes-a-person-prosperous/
बुखार जब पुराना हो जाए तो उसमें मालिश लाभ देती है।
वातज रोगों में चिकित्सकीय निर्देशों अनुसार मालिश करनी चाहिए।
गठिया रोग में जब यूरिक ऐसिड बढ़ जाता है तो औषध सिद्व तैल से मालिश करने से लाभ होता हैं
प्रोफेसर अनूप कुमार गक्खड़

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