आयुर्वेद में पदार्थ विज्ञान पढ़ने की आवश्यकता क्यों

                                 पदार्थ विज्ञान को हम क्यों पढ़े ? यह प्रश्न विधार्थियों को विचित्र लगता होगा। हमारा स्वभाव है कि हम उस पर ही विश्वास करते हैं जिसको हम स्वयं अपनी आंखों से देख लेतें हैं। लेकिन उससे भी हटकर एक अलग दुनिया है। भूकम्प आना, आंधी तूफान का आना, सुनामी आना, महामारी फैलना आदि Continue Reading

Acidity : Symptoms, Causes and Home Remedies

Acidity finds its mention in as amalpitta in Ayurvedic texts. Due to the present-day run-of-the-clock lifestyle, our food habits have also been influenced. Trend of having fast food, irregular meal hours, taking spicy meal, is increasing day by day.  Use of adulterated food also affects the body’s digestive tract. In this way, a disease reflected Continue Reading

पूर्वजन्म के कर्म प्रभावित करते हैं स्वास्थ्य

माता के आचरण व खानपान में कोई त्रुटि न होते हुये भी कुछ बच्चे बीमार ही पैदा होते है । यहां पर ये दोष गर्भावस्था में माता की जीवनशैली के कारण नही अपितु पूर्वजन्म के कर्म होते है। इसी तरह बहुत बार जो रोग आसानी से ठीक हो सकते हैं उचित चिकित्सा करने पर भी Continue Reading

Know Importance of Ashtanga hridya

                          Among the various creations of Vaghbhatta , Ashtanga Hridya is more popular than Ashtang sangreh. It is Ashtanga hridya and not the Ashtang Sangreh  that finds its  inclusion in Brihatryi. The knowldege embedded in Ashtanga hridya is practised all over the country. Vaghbhatta the son of Singhgupta first compiled Ashtanga Sangreh to meet the Continue Reading

आयुर्वेद के चिकित्सक आयुर्वेद उत्थान परम्परा के ही वाहक बने

            आयुर्वेद के चिकित्सक  आयुर्वेद उत्थान परम्परा के ही वाहक बने आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति महान है, इसका अतीत सुनहरी है, इसके ग्रन्थों में चिकित्सा के ऐसे परिणामों का उल्लेख है जिसकी वर्तमान युग में कल्पना भी नही की जा सकती, लोगों की रुचि इस ओर बढ़ रही है, पूरे विश्व की आंखें इस तरफ लगी Continue Reading

क्यों होती है चिकित्सा निष्फल

                   काश्यप संहिता अनुसार शरीर तथा आयु की अव्याहतरूप में वद्धि तथा विकारों की शान्ति के लिये चिकित्सा कही गयी है। भावप्रकाश में चिकित्सा का कार्य कष्ट से मुक्ति है न कि मृत्यु पर विजय का कथन मिलता है। पंचमहाभूत व शरीरी का समवाय सम्बन्ध से संजात संयोग पुरुष कहलाता है और यही कर्म पुरुष Continue Reading

भ्रामक विज्ञापन—आयुर्वेद के पतन के कारण

                 अतीत में भारत देश पर विभिन्न विदेशी शासकों का प्रभुत्व रहने के कारण उनका आयुर्वेद के प्रति दृष्टिकोण नकारात्मक होते हुये भी आयुर्वेद द्वारा अपनी अस्मिता को बचाए रखना उसमें निहित गुणों का द्योतक है। पर अपने ही देश में आयुर्वेद का विकास परोक्ष कारणों से  बाधित हो रहा है। आयुर्वेद की जड़ों में Continue Reading

स्वस्थ रहने के लिये आवश्यक है उत्तम आचरण

मौत को जीतने के लिये सम्पूर्ण विश्व प्रयासशील है, पर जीवन कैसे जीना चाहिए यह ज्ञान आयुर्वेद में ही समाहित है। आयुर्वेद अपने देश की परिस्थितयों के अनुरूप रचित ज्ञान का भण्डार है। प्राचीन भारतीय ज्ञान के स्रोत न केवल शिक्षा पर अपितु उच्च नैतिक मूल्यों एवं उत्तम स्वास्थ्य प्राप्ति के साधनों पर भी आधारित Continue Reading

बिना संहिताओं के अध्ययन से आयुर्वेद का ज्ञान सम्भव नही

आयुर्वेद का अध्ययन संहिता परक है। अतः बिना संहिताओं के ज्ञान के आयुर्वेद का अध्ययन सम्भव नही है। सभी प्रमुख संहिताएं संस्कृत में है। बिना मूल ग्रन्थों के अध्ययन के विषयों को ठीक से समझा नही जा सकता। अतः आयुर्वेद के विषयों में दक्ष होने के लिये संस्कृत का ज्ञान होना आवश्यक है। न केवल Continue Reading